'भारत अगर रूसी तेल खरीदना कम भी करे तो यूक्रेन जंग नहीं रुकेगी', जयशंकर का पश्चिमी देशों को दो टूक जवाब

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'भारत अगर रूसी तेल खरीदना कम भी करे तो यूक्रेन जंग नहीं रुकेगी', जयशंकर का पश्चिमी देशों को दो टूक जवाब

04 सितंबर 2026 को 10:06 am बजे
'भारत अगर रूसी तेल खरीदना कम भी करे तो यूक्रेन जंग नहीं रुकेगी', जयशंकर का पश्चिमी देशों को दो टूक जवाब
'भारत अगर रूसी तेल खरीदना कम भी करे तो यूक्रेन जंग नहीं रुकेगी', जयशंकर का पश्चिमी देशों को दो टूक जवाब
भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर अपने दौरे पर यूक्रेन की राजधानी कीव में थे (फोटो- एएफपी)

रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर भारत के विदेश मंत्री जयशंकर ने पश्चिमी देशों को दो टूक जवाब दिया है. भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर अपने दौरे पर यूक्रेन की राजधानी कीव में थे. यहां उन्होंने कहा कि भारत अगर रूस से तेल खरीदना कम भी कर दे, तो इससे यूक्रेन की जंग नहीं रुकेगी. उन्होंने पश्चिमी देशों की उस बात को खारिज किया, जिसमें कहा जा रहा है कि रूस की कमाई का जरिया बंद करने से वह जंग छोड़ने पर मजबूर हो जाएगा.

मीडिया से बात करते हुए जयशंकर ने कहा कि यह जंग अब पांचवें साल में पहुंच चुकी है और इसे सिर्फ बातचीत, कूटनीति और समझौते के जरिए ही खत्म किया जा सकता है. यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्रिय सिबिहा से मुलाकात के बाद जयशंकर ने कहा, “यह जंग आज पांचवें साल में है. यह इस वजह से खत्म नहीं होगी कि कोई तेल, एल्युमिना, खनिज, धातु या खाद खरीद रहा है या नहीं खरीद रहा. यह जंग बातचीत, कूटनीति और समझौते से ही खत्म होगी.”

जयशंकर ने भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने की मुश्किलों पर भी बात की. उन्होंने कहा कि भारत की 1.4 अरब आबादी के लिए ऊर्जा की जरूरत पूरी करना आसान नहीं है. उन्होंने कहा कि इस मामले में भारत और यूक्रेन, दोनों के नजरिए का सम्मान किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा, “यह भी जरूरी है कि आप सभी समझें कि ऐसे समय में 1.4 अरब लोगों के लिए ऊर्जा का इंतजाम करना कितना मुश्किल है, जब दुनिया में ऊर्जा की स्थिति बहुत कठिन है. यूक्रेन का इस मुद्दे पर अपना नजरिया है, जिसका हम सम्मान करते हैं. हमारा भी अपना नजरिया है और मैं उम्मीद करता हूं कि दूसरे देश भी उसका सम्मान करेंगे.”

भारत पर पश्चिमी देशों का दबाव

जयशंकर से पूछा गया था कि अगर अमेरिका उन देशों पर प्रतिबंध या टैक्स लगाने वाला कानून पास करता है, जो रूस से ऊर्जा खरीदना जारी रखते हैं, तो क्या भारत रूस से तेल खरीदना कम करेगा. इस सवाल के जवाब में उन्होंने उपर बताई गईं बातें कहीं. दरअसल अमेरिका और ब्रिटेन समेत पश्चिमी देश यूक्रेन की इस बात का समर्थन करते हैं कि रूस के ऊर्जा कारोबार को रोकने से उसकी कमाई कम होगी. इससे यूक्रेन में चल रही जंग के लिए रूस को मिलने वाला पैसा भी कम हो जाएगा.

पिछले महीने अमेरिकी सीनेट ने एक ऐसा विधेयक पास किया था, जिसके तहत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उन देशों के सामान पर 100 प्रतिशत तक टैक्स लगाने का अधिकार मिल सकता है, जो रूस से तेल और गैस खरीदना जारी रखते हैं. इसमें भारत और चीन भी शामिल हैं. इस कानून में कहा गया है कि रूस के साथ इस तरह का कारोबार उसकी अर्थव्यवस्था को मजबूत करता है और यूक्रेन में उसके सैन्य अभियान के लिए पैसे जुटाने में मदद करता है.

रूस से भारत की तेल खरीद

कई महीनों से अमेरिका के दबाव के बावजूद रूस भारत के कच्चे तेल का सबसे बड़ा सप्लायर बना हुआ है. हालांकि, जून और जुलाई में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद अगस्त में रूस से भारत की तेल खरीद काफी कम हुई है. 2021 तक, यानी रूस के यूक्रेन पर हमला शुरू करने से पहले, भारत जितना कच्चा तेल विदेशों से खरीदता था, उसमें रूस की हिस्सेदारी सिर्फ 0.2 प्रतिशत थी. लेकिन फरवरी 2022 में रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद पश्चिमी देशों ने रूस से तेल खरीदना कम कर दिया. इसके बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक भारत, रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदने वाला सबसे बड़ा देश बन गया.

भारत अपनी जरूरत का करीब 88 प्रतिशत कच्चा तेल दूसरे देशों से खरीदता है. इसी कच्चे तेल से पेट्रोल और डीजल जैसे फ्यूल बनाए जाते हैं. भारत के कुल कच्चे तेल आयात का करीब एक-तिहाई रूस से आता है. समुद्री कारोबार से जुड़ी जानकारी देने वाली कंपनी केप्लर के आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त में भारत ने रूस से हर दिन करीब 21 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदा. यह भारत के कुल कच्चे तेल आयात का 40 प्रतिशत से ज्यादा था. हालांकि, यह मात्रा जून और जुलाई के करीब 26 लाख बैरल रोजाना के मुकाबले कम थी.

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