अमेरिकी चुनाव में दखल की कोशिश? रूस पर सीक्रेट ऑनलाइन कैंपेन का आरोप

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अमेरिकी चुनाव में दखल की कोशिश? रूस पर सीक्रेट ऑनलाइन कैंपेन का आरोप

19 सितंबर 2026 को 07:57 am बजे
अमेरिकी चुनाव में दखल की कोशिश? रूस पर सीक्रेट ऑनलाइन कैंपेन का आरोप

अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को रूस की ओर से एक गुप्त ऑनलाइन अभियान चलाए जाने की जानकारी मिली है. यह अभियान नवंबर में होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनाव को लेकर लोगों के भरोसे को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है. अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, रूस ऑनलाइन माध्यमों का इस्तेमाल कर चुनाव प्रक्रिया को लेकर शक पैदा करने की कोशिश कर रहा है.

अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के मुताबिक, इस अभियान का मकसद सीधे वोटिंग मशीनों को निशाना बनाना नहीं है. इसके बजाय ऑनलाइन सामग्री के जरिए लोगों की सोच को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है. ऐसी सामग्री में चुनाव प्रक्रिया को लेकर संदेह पैदा करने वाली बातें शामिल हो सकती हैं.

दरअसल, रूस पर पहले भी इसी तरह के अभियान चलाने के आरोप लगते रहे हैं. अमेरिकी खुफिया एजेंसियां लंबे समय से रूस को विदेशी चुनावी हस्तक्षेप का प्रमुख खतरा मानती रही हैं. जुलाई 2024 की एक अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट में भी कहा गया था कि रूस सोशल मीडिया के जरिए अमेरिकी वोटर्स तक पहुंचने और खास समूहों को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है.

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अमेरिकी एजेंसियों ने पहले भी ऐसे मामलों की जानकारी दी है, जिसमें रूस से जुड़े लोगों ने फर्जी खबरें और वीडियो तैयार किए. इनका मकसद चुनाव की विश्वसनीयता पर सवाल उठाना और लोगों में डर या भ्रम पैदा करना बताया गया था. नवंबर 2024 में एफबीआई, अमेरिकी खुफिया निदेशक कार्यालय और साइबर सुरक्षा एजेंसी ने संयुक्त बयान में कहा था कि रूस से जुड़े लोग चुनाव की वैधता पर सवाल उठाने वाली सामग्री बना रहे थे.

इन अभियानों में सोशल मीडिया का इस्तेमाल खास तौर पर अहम माना जाता है. फर्जी पहचान वाले खाते बनाए जा सकते हैं. इन खातों से एक ही तरह की बातें बार-बार शेयर की जाती हैं. इसका मकसद किसी दावे को ज्यादा लोगों तक पहुंचाना होता है.

अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का कहना है कि रूस की कोशिश केवल चुनाव से पहले माहौल प्रभावित करने तक सीमित नहीं है. ऐसे अभियानों का एक मकसद चुनाव के बाद आने वाले नतीजों पर भी लोगों का भरोसा कमजोर करना हो सकता है.

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अमेरिकी एजेंसियां यह भी साफ कर चुकी हैं कि ऑनलाइन प्रभाव डालने की कोशिश और वोटों में सीधे छेड़छाड़ अलग-अलग चीजें हैं. अब तक सामने आई अमेरिकी सरकारी रिपोर्टों में रूस की ओर से वोटों की गिनती बदलने का कोई सबूत नहीं बताया गया है. अमेरिकी अधिकारियों की चिंता मुख्य रूप से गलत सूचनाओं और चुनाव को लेकर अविश्वास फैलाने को लेकर है.

दरअसल, अमेरिकी चुनावों में रूस की ऑनलाइन गतिविधियों का मामला नया नहीं है. 2016 के राष्ट्रपति चुनाव के बाद से अमेरिकी एजेंसियां ऐसे अभियानों की जांच करती रही हैं. 2024 के चुनाव के दौरान भी रूस से जुड़े समूहों पर फर्जी वेबसाइट और सोशल मीडिया नेटवर्क के जरिए अमेरिकी लोगों तक गलत जानकारी पहुंचाने के आरोप लगे थे. अमेरिकी न्याय विभाग ने 2024 में रूस से जुड़े ऐसे नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई की थी.

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अब नवंबर के मिडटर्म चुनाव से पहले अमेरिकी एजेंसियां ऐसे अभियानों पर नजर रख रही हैं. उनका कहना है कि विदेशी ताकतें ऑनलाइन माध्यमों का इस्तेमाल कर अमेरिकी वोटर्स को प्रभावित करने और चुनाव प्रक्रिया पर भरोसा कमजोर करने की कोशिश कर सकती हैं. ऐसे में गलत सूचनाओं की पहचान और उनकी रोकथाम सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है.

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