टारगेट सेट, जेट तैयार... हूती पर हमले की तैयारी तो थी, फिर बदल गया ट्रंप का स्टैंड

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टारगेट सेट, जेट तैयार... हूती पर हमले की तैयारी तो थी, फिर बदल गया ट्रंप का स्टैंड

21 सितंबर 2026 को 09:25 am बजे
टारगेट सेट, जेट तैयार... हूती पर हमले की तैयारी तो थी, फिर बदल गया ट्रंप का स्टैंड

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हूतियों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को लेकर लगातार अपना फैसला बदलते नजर आए. सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने उन्हें फोन कर हूतियों पर अमेरिकी हमले शुरू करने की अपील की थी. इससे एक दिन पहले ट्रंप अपने सलाहकारों से कह चुके थे कि वह हूतियों पर एयरस्ट्राइक के पक्ष में नहीं हैं, लेकिन MBS से बातचीत के बाद उन्होंने अपना रुख बदल दिया. पेंटागन को हमले की तैयारी करने का आदेश दे दिया.

इसके बाद अमेरिकी सैन्य कमांडरों ने हूती ठिकानों की टारगेट लिस्ट मंजूर कर ली. हमले के लिए चुने गए अमेरिकी लड़ाकू विमानों में बम लोड किए जा रहे थे और कार्रवाई शुरू होने वाली थी. न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, लेकिन रविवार दोपहर तक ट्रंप ने एक बार फिर अपना फैसला बदल दिया. प्रशासन के अधिकारियों के मुताबिक, फिलहाल हूतियों के खिलाफ अमेरिकी एयरस्ट्राइक नहीं होगी.

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रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले करीब दो हफ्तों से ट्रंप के सामने यह सवाल था कि क्या अमेरिका को हूतियों के खिलाफ सऊदी अरब के साथ सैन्य कार्रवाई में शामिल होना चाहिए. MBS ने गुरुवार को ट्रंप को फोन किया और हूतियों के तेजी से बढ़ते हमलों को रोकने के लिए अमेरिकी मदद मांगी. इसके बाद ट्रंप ने पेंटागन को हमले की तैयारी करने को कहा.

हालांकि, ट्रंप के करीबी लोगों में इस कार्रवाई को लेकर सहमति नहीं थी. एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी के मुताबिक, राष्ट्रपति के आंतरिक सर्कल के ज्यादातर लोग सऊदी अरब की लड़ाई में सीधे शामिल होने को लेकर या तो काफी आशंकित थे या इसके खिलाफ थे. ट्रंप के सामने ईरान के साथ चल रही जंग के बीच यमन में एक और मोर्चा खोलने का जोखिम भी था.

हूती को लेकर क्यों कन्फ्यूज हो रहे राष्ट्रपति ट्रंप?

फॉक्स न्यूज से फोन पर बातचीत में रविवार सुबह ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ बड़ी जंग को लेकर वह अभी फैसला लेने की स्थिति में हैं. हूतियों को लेकर उन्होंने कहा कि अमेरिका लगातार उनके संपर्क में है और हूतियों ने अब तक अमेरिकी जहाजों के खिलाफ लड़ाई नहीं करने पर सहमति जताई है.

यही बात ट्रंप के सामने बड़ी दुविधा बन गई है. हूतियों ने अमेरिकी जहाजों को निशाना नहीं बनाया है, लेकिन सऊदी अरब पर उनके हमले लगातार बढ़े हैं. ऐसे में अमेरिका पर अपने सहयोगी सऊदी अरब की मदद का दबाव है. वहीं, अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के एक वर्ग का मानना है कि ईरान के खिलाफ जंग में अमेरिका को सऊदी अरब के सहयोग की जरूरत है.

सऊदी अरब भी अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर चुका है. रिपोर्ट के मुताबिक, मई में रियाद ने अमेरिकी सेना को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले कमर्शियल तेल टैंकरों को सुरक्षा देने की योजना में सहयोग नहीं किया था. सऊदी ने अमेरिकी विमानों को अपने एयरस्पेस और अमेरिकी सेना को अपने एयरबेस के इस्तेमाल की इजाजत नहीं दी थी.

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हूती 2014 से यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के खिलाफ लड़ रहे हैं, जिसे सऊदी अरब का समर्थन हासिल है. 2022 में संघर्ष धीमा पड़ा था, लेकिन इस गर्मी में हूतियों ने फिर हमले तेज कर दिए. उन्होंने लाल सागर में सऊदी शिपिंग पर नाकेबंदी का ऐलान किया और सऊदी जहाजों को निशाना बनाया.

हूतियों के बाब अल-मंदब स्ट्रेट के पास अहम इलाकों पर कब्जे ने भी चिंता बढ़ा दी है. यह लाल सागर का एक अहम समुद्री रास्ता है. ऐसे में पहले से ईरान के साथ जंग और होर्मुज स्ट्रेट में तनाव के बीच हूतियों के खिलाफ अमेरिकी कार्रवाई पूरे क्षेत्र में एक नया मोर्चा खोल सकती है.

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