दिल्ली की जहरीली हवा साफ करेगा ये स्मार्ट पोल, जानिए कैसे

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दिल्ली की जहरीली हवा साफ करेगा ये स्मार्ट पोल, जानिए कैसे

06 सितंबर 2026 को 06:11 am बजे
दिल्ली की जहरीली हवा साफ करेगा ये स्मार्ट पोल, जानिए कैसे

दिल्ली में पॉल्यूशन की समस्या किसी से छिपी नहीं है. सर्दियों में तो हाल और भी ज्यादा खराब हो जाता है. हवा में प्रदूषण का लेवल बढ़ते ही लोगों को सांस लेने में दिक्कत होने लगती है. इसी समस्या को कम करने के लिए अब टेक्नोलॉजी का सहारा लिया जा रहा है. दिल्ली में स्मार्ट पोल लगाए गए हैं, जो हवा की क्वालिटी पर नजर रखने के साथ-साथ प्रदूषण कम करने में भी मदद कर सकता हैं. आइए जानते हैं इसके बारे में.

दिल्ली में लगाए गए इन स्मार्ट पोल पर हवा से जुड़ी जानकारी देखने को मिलती है. इसमें PM2.5 और PM10 जैसे पॉल्यूशन का लेवल दिखाया जाता है. खास बात ये है कि ये जानकारी हर कुछ मिनट में अपडेट होती रहती है.

इससे लोगों को पता चल सकता है कि उनके आसपास की हवा कितनी साफ या खराब है. कुछ स्मार्ट पोल में यह भी दिखाया जाता है कि सिस्टम ने पिछले 24 घंटे में कितनी हवा को ट्रीट किया है.

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स्मार्ट पोल का काम सिर्फ हवा की जानकारी दिखाना नहीं है. इनका इस्तेमाल हवा में मौजूद प्रदूषण को कम करने के लिए भी किया जा रहा है. दिल्ली में अभी इन स्मार्ट पोल का ट्रायल चल रहा है. इन्हें अलग-अलग जगहों पर लगाया गया है और देखा जा रहा है कि ये असल में प्रदूषण कम करने में कितने काम के हैं. यानी अगर ये टेक्नोलॉजी टेस्ट में सही साबित होती है तो आने वाले समय में इसे और ज्यादा जगहों पर लगाया जा सकता है.

दिल्ली सरकार पॉल्यूशन से निपटने के लिए सिर्फ स्मार्ट पोल पर फोकस नहीं कर रही है. कई दूसरी टेक्नोलॉजी का भी टेस्ट किया जा रहा है. इनमें गाड़ियों से निकलने वाले प्रदूषण को कम करने वाले एयर फिल्टर और दूसरे सिस्टम शामिल हैं. इसके अलावा सड़क की धूल को कम करने और हवा में मौजूद प्रदूषण को कंट्रोल करने वाली टेक्नोलॉजी भी टेस्ट की जा रही है.

कुछ सिस्टम बड़े एयर प्यूरिफायर की तरह काम करते हैं, जबकि कुछ टेक्नोलॉजी सड़क के आसपास की धूल और हवा में मौजूद पॉल्यूशन को कम करने पर काम करती हैं.

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सबसे जरूरी बात ये है कि किसी भी टेक्नोलॉजी को सिर्फ इसलिए बड़े स्तर पर इस्तेमाल नहीं किया जाएगा क्योंकि वो देखने में हाईटेक है. पहले यह देखा जाएगा कि असल में कितना पॉल्यूशन कम हो रहा है.

इन टेक्नोलॉजी की टेस्टिंग और निगरानी के लिए IIT दिल्ली और दूसरी वैज्ञानिक की मदद ली जा रही है. इसका मकसद यह पता लगना है कि कौन-सा सिस्टम जमीन पर सबसे ज्यादा असर दिखा रहा है. अगर कोई टेक्नोलॉजी टेस्ट में बेहतर रिजल्ट देती है तो उसे आगे बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया जा सकता है.

यानी आने वाले समय में दिल्ली की हवा को साफ करने के लिए सिर्फ पेड़-पौधों और नॉर्मल उपायों पर निर्भर रहने के बजाय टेक्नोलॉजी का भी इस्तेमाल बढ़ सकता है.

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