Hanuman Ansh Box Office Collection Day 48: 50 दिन पूरे होने से दो दिन दूर हनुमान अंश, 48वें दिन भी तूफानी कमाई जारी
Hanuman Ansh Box Office Collection Day 48: 50 दिन पूरे होने से दो दिन दूर हनुमान अंश, 48वें दिन भी तूफानी कमाई जारी

Hanuman Ansh Box Office Collection Day 48: नीम करोली बाबा पर बनीं हनुमान अंश को बॉक्स ऑफिस पर 50 दिन पूरे होने वाले हैं. अभी तक फिल्म को 48 दिन बीत चुके हैं. हालांकि फिल्म की कमाई की रफ्तार कम नहीं हुई है. लेकिन बीते पिछले कुछ दिनों में फिल्म की कमाई में ड्रॉप देखा गया है. पर फिर भी हनुमान अंश प्रॉफिट के मामले में धुरंधर, पठान, जवान और केजीएफ जैसी फिल्मों को धोबी पछाड़ दे चुकी है. वहीं 48वें दिन भी फिल्म की तूफानी कमाई जारी रही और 4 करोड़ का कलेक्शन फिल्म ने बुधवार को हासिल किया.
हनुमान अंश का 48 दिनों का कलेक्शन
बॉक्स ऑफिस ट्रैकर सैकनिल्क के आंकड़ों के अनुसार, हनुमान अंश ने 7,358 शोज से 4 करोड़ की कमाई हासिल की थी. वहीं इसके बाद नेट कलेक्शन 284.93 करोड़ भारत में हुआ. जबकि इंडिया ग्रॉस कलेक्शन 336.45 करोड़ पहुंचा है. वहीं ओवरसीज 48वें दिन 1 करोड़ की कमाई के साथ ओवरसीज ग्रॉस 35.75 करोड़ रहा. इसके बाद वर्ल्डवाइड 2 करोड़ के बजट में बनीं फिल्म की कमाई 272.20 करोड़ पहुंची है.
हनुमान अंश का मुनाफा
हनुमान अंश 2 करोड़ के बजट में बनीं फिल्म है, जिसने बॉक्स ऑफिस पर 18वें दिन रफ्तार पकड़ी थी, जिसके चलते फिल्म ने 350 करोड़ का आंकड़ा बॉक्स ऑफिस पर हासिल कर लिया. इस हिसाब से फिल्म को 372.20 करोड़ का प्रॉफिट हुआ. वहीं 185 गुना फिल्म ने कमाई हासिल कर ली है. जबकि 18,510 प्रतिशत फिल्म का प्रॉफिट है.
हनुमान अंश की कहानी
जो लोग नहीं जानते उन्हें बता दें कि हनुमान अंश की कहानी बाबा नीम करौली के जीवन से प्रेरित है. कहानी की शुरुआत भोसले नाम के किरदार से होती है, जिसका रोल चंदन आनंद ने निभाया है. वह अपने पोते को बाबा के बारे में बताते हैं और अपनी पहली मुलाकात का किस्सा सुनाते हैं. यह घटना साल 1942 की है, जब भोसले एक क्रांतिकारी हुआ करते थे. इसके बाद कहानी बाबा के बचपन और उनकी आध्यात्मिक तलाश की ओर चली जाती है. फिल्म में 12 साल के लक्ष्मी नारायण की कहानी दिखाई गई है, जो अपनी मां की मौत के बाद अंदर से पूरी तरह टूट जाता है. वह अकबरपुर गांव में अपना घर छोड़ देता है, उसे लगता है कि ईश्वर को खोजने के बाद शायद वह अपनी मां से दोबारा मिल सकेगा. इसके बाद उसकी यात्रा मंदिरों, जंगलों, नदियों और गांवों से होकर गुजरती है. लेकिन, समय के साथ उसकी ईश्वर की तलाश का मतलब बदलने लगता है. वह भूखों को खाना खिलाने, लोगों की मदद करने, बिना भेदभाव प्यार करने और निस्वार्थ सेवा को अपने जीवन का हिस्सा बना लेता है.
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