पेपर लीक बिल के पांच प्रावधान जो पुराने कानून से अलग होंगे

राजनीति

पेपर लीक बिल के पांच प्रावधान जो पुराने कानून से अलग होंगे

27 जुलाई 2026 को 08:45 am बजे
पेपर लीक बिल के पांच प्रावधान जो पुराने कानून से अलग होंगे

पेपर लीक के मामले को सरकार सख्त कदम उठाने जा रही है.  सोमवार को मॉनसून सत्र के दौरान लोकसभा में इससे जुड़ा बड़ा संशोधन बिल पेश होने वाला है. केंद्र सरकार इस बिल के जरिये परीक्षाओं में पेपर लीक और नकल पर शिकंजा कसने का प्लान बना रही है. इस संशोधन बिल में क्या है खास इस पर डालते हैं एक नजर-

संशोधन बिल का नाम- सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक-2026

1. क्या है प्रस्ताव- A. हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में पेपर लीक मामलों की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करने का प्रस्ताव  B. अदालतों में रोजाना सुनवाई होगी C. चार्जशीट दाखिल होने के तीन महीने के भीतर ट्रायल पूरा करना होगा.

2. सजा कितनी कड़ी होगी?A. पेपर लीक और परीक्षा में अनुचित साधनों के इस्तेमाल से जुड़े मामलों की जांच दो महीने के भीतर पूरी करनी होगी.  B. दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों को कम से कम 5 साल और अधिकतम 10 साल तक की जेल तथा 50 लाख रुपये तक का जुर्माना C. संगठित तरीके से पेपर लीक या परीक्षा में धांधली करने वाले गिरोहों के लिए सजा ज्यादा कड़ी D. ऐसे मामलों में न्यूनतम 7 साल की जेल और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है.

3. अभी के लागू कानून में क्या है प्रावधान? मौजूदा दौर में लागू कानून सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 में सामान्य मामलों में 3 से 5 साल की जेल और संगठित अपराध के मामलों में 5 से 10 साल की सजा तथा कम से कम 1 करोड़ रुपये जुर्माने का प्रावधान है.

नया संशोधन कानून इन प्रावधानों को और सख्त बनाएगा.  विधेयक को सोमवार को (आज) लोकसभा में पेश करने, उस पर चर्चा और पारित कराने के लिए सूचीबद्ध किया गया है.  हालांकि, आमतौर पर किसी विधेयक को एक ही दिन में पेश और पारित करने की प्रक्रिया कम ही देखने को मिलती है.

संशोधन विधेयक के तहत सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को किसी भी सेशन कोर्ट को विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट के रूप में अधिसूचित करने का अधिकार दिया जाएगा. इन अदालतों में रोजाना सुनवाई होगी और चार्जशीट दाखिल होने के तीन महीने के भीतर मुकदमे का निपटारा करना होगा. इसके अलावा, जरूरत पड़ने पर केंद्र सरकार किसी भी मामले की जांच के लिए विशेष टास्क फोर्स (Special Task Force) भी गठित कर सकेगी.

यह भी पढ़िएः Exclusive: पेपर लीक रोकने में सबसे बड़ी चुनौती क्या? PM मोदी की 'टास्क फोर्स' के एक्सपर्ट ने बताया

विधेयक में परीक्षाओं के लिए नए गाइडलाइंस तय करने का भी प्रस्ताव है. इसमें परीक्षा केंद्रों का प्री-ऑडिट, उम्मीदवारों की बायोमेट्रिक जांच, सुरक्षा व्यवस्था, सीट आवंटन, प्रश्नपत्र तैयार करने और अपलोड करने की प्रक्रिया, परीक्षा में निगरानी, परीक्षा के बाद की गतिविधियां और दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए स्क्राइब उपलब्ध कराने जैसे प्रावधान शामिल हैं. विधेयक में 15 प्रकार की गतिविधियों को स्पष्ट रूप से अपराध की श्रेणी में रखा गया है.

इनमें प्रश्नपत्र लीक करना, ओएमआर शीट से छेड़छाड़, फर्जी वेबसाइट बनाना, फर्जी एडमिट कार्ड जारी करना और परीक्षा प्रक्रिया में अन्य प्रकार की धोखाधड़ी शामिल हैं. इस संशोधन विधेयक को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 24 जुलाई को मंजूरी दी थी, जिसे 27 जुलाई को लोकसभा में पेश किया जाएगा. सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य परीक्षाओं की पारदर्शिता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को मजबूत करना है.

शेयर करें
हिंदी खबर नेटवर्क पर पढ़ें ताज़ा हिंदी समाचार।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

Hyderabad News: 58 हजार करोड़ से बदलेगी मूसी नदी की सूरत, लंदन की टेम्स की तर्ज पर बनेगा रिवरफ्रंट

बॉक्स ऑफिस कलेक्शन: पहले दिन 100 करोड़ पार 'टॉक्सिक', शाहरुख और रणवीर सिंह की इन फिल्मों का तोड़ डाला रिकॉर्ड

Toxic Box Office Collection Day 1: यश की टॉक्सिक ने पहले दिन कमाए 140 करोड़, जवान और एनिमल को छोड़ा पीछे