छात्र आंदोलन में सीवान में चला था AK-47, SC में बिहार सरकार का कुबूलनामा
छात्र आंदोलन में सीवान में चला था AK-47, SC में बिहार सरकार का कुबूलनामा

बिहार में छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. राज्य सरकार ने अदालत में दाखिल हलफनामे में प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग के आरोपों से इनकार किया है. सरकार का कहना है कि बिहार के कई हिस्सों में प्रदर्शन हिंसक हो गए थे, जिनमें पुलिस अधिकारियों, प्रशासनिक अधिकारियों और प्रदर्शनकारियों को चोटें आईं.
बिहार सरकार के मुताबिक, 22 जुलाई से 25 जुलाई के बीच प्रदर्शन को लेकर कुल 69 एफआईआर दर्ज की गईं. करीब 500 गिरफ्तारियां हुईं. हालांकि, जिन 222 छात्र प्रदर्शनकारियों का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था, उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया. सरकार ने यह भी कहा कि 18 साल से कम उम्र के ऐसे बच्चों को, जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था, साधारण बॉन्ड भरवाकर छोड़ दिया गया.
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हलफनामे में छपरा की घटना का भी जिक्र किया गया है. सरकार के मुताबिक, वहां दो BDO, तीन पुलिस इंस्पेक्टर, दो सब-इंस्पेक्टर और 11 कांस्टेबल घायल हुए. इनमें एक BDO की एक आंख चली गई, जबकि दूसरे अधिकारी को सिर में गंभीर चोट लगी. उनकी हालत बेहद गंभीर बताई गई है.
सिवान में भीड़ में फंसने के बाद एक कांस्टेबल ने अपनी AK-47 से हवा में चार राउंड फायर किए. सरकार ने कहा कि इस फायरिंग में कोई घायल नहीं हुआ. घटना के बाद संबंधित कांस्टेबल को सस्पेंड कर दिया गया है और उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की गई है.
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एक अन्य घटना में हाथी चौक पर एक ASI ने 9 एमएम पिस्टल से दो राउंड फायर किए. सरकार के अनुसार, इसमें तीन प्रदर्शनकारियों को मामूली गोली लगी. इस मामले में बैलिस्टिक जांच की जा रही है, ताकि इस्तेमाल किए गए हथियार, फायरिंग की दूरी और गोली चलने के कोण का पता लगाया जा सके.
राज्य सरकार ने यह भी कहा है कि फिलहाल प्रदर्शनकारियों की निजी जानकारी और डिजिटल डेटा सार्वजनिक नहीं किया जाएगा. सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे के जरिए सरकार ने पुलिस कार्रवाई को लेकर अपना पक्ष रखा है.
राज्य सरकार ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार सभी वीडियो फुटेज और अन्य रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के निर्देश अतिरिक्त DGP को दिए गए हैं. प्रदर्शन के दौरान जुटाई गई प्रदर्शनकारियों की निजी जानकारी और डिजिटल डेटा को फिलहाल सार्वजनिक या सोशल मीडिया पर साझा नहीं करने को कहा गया है. सरकार का कहना है कि छात्रों समेत प्रदर्शनकारियों की पहचान संबंधी जानकारी प्रकाशित नहीं की जा रही है.
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