पापा, कैसे हो? सुनने की आस रह गई अधूरी, अब आंखें किसी और को दिखाएंगी दुनिया, शिवचरण की कहानी
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पापा, कैसे हो? सुनने की आस रह गई अधूरी, अब आंखें किसी और को दिखाएंगी दुनिया, शिवचरण की कहानी
06 अगस्त 2026 को 09:28 am बजे
सोनीपत के वृद्ध आश्रम में रह रहे शिवचरण रामरतन गुप्ता जीवन के आखिरी दिनों तक बेटियों के एक फोन का इंतजार करते रहे. आश्रम प्रबंधन के अनुसार, बीमारी की सूचना देने के बावजूद बेटियां अंतिम समय में नहीं पहुंच सकीं और वीडियो कॉल पर अंतिम विदाई दी. हालांकि, शिवचरण के नेत्रदान ने उनकी कहानी को नई उम्मीद दी. अब उनकी आंखें किसी जरूरतमंद की दुनिया रोशन करेंगी.
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