बारामूला से टीम इंडिया... एक फैसले ने बदल दी आकिब की जिंदगी

खेल

बारामूला से टीम इंडिया... एक फैसले ने बदल दी आकिब की जिंदगी

04 अगस्त 2026 को 10:18 am बजे
बारामूला से टीम इंडिया... एक फैसले ने बदल दी आकिब की जिंदगी

हर क्रिकेटर की सफलता के पीछे संघर्ष की एक कहानी होती है, लेकिन आकिब नबी की कहानी एक ऐसे फैसले से शुरू होती है... जिसने उनकी पूरी जिंदगी की दिशा बदल दी.

उस वक्त आकिब 12वीं बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहे थे. बायो साइंस के छात्र थे और घरवालों की इच्छा थी कि वह पढ़ाई पर ध्यान दें, मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी करें और एक सुरक्षित भविष्य चुनें. तभी बीसीसीआई के तेज गेंदबाजों के विशेष शिविर के लिए उनका चयन हो गया. यह कोई साधारण कैंप नहीं था. वहां ऑस्ट्रेलिया के महान तेज गेंदबाज ग्लेन मैक्ग्रा युवा पेसरों को गेंदबाजी की बारीकियां सिखाने वाले थे.

लेकिन घर में इस अवसर को लेकर खुशी से ज्यादा दुविधा थी. आकिब के पिता गुलाम नबी डार सरकारी स्कूल में शिक्षक थे. उनके लिए शिक्षा सबसे बड़ी पूंजी थी. उन्हें डर था कि क्रिकेट के पीछे भागने से बेटे की पढ़ाई प्रभावित होगी. इसलिए उन्होंने शुरुआत में साफ मना कर दिया कि आकिब इस शिविर में नहीं जाएंगे.

यहीं से कहानी में एंट्री होती है आकिब के पहले क्लब कप्तान और करीबी दोस्त जुबैर डार की. उन्होंने गुलाम नबी डार को समझाया कि हर खिलाड़ी को ग्लेन मैक्ग्रा जैसे दिग्गज से सीखने का मौका नहीं मिलता. काफी बातचीत के बाद आखिरकार पिता मान गए. सीमित वेतन वाले सरकारी शिक्षक होने के बावजूद उन्होंने करीब 10 हजार रुपये का इंतजाम किया और बेटे को ट्रेन से नहीं, बल्कि हवाई जहाज से चेन्नई भेजा, ताकि वह समय पर कैंप में पहुंच सके.

वर्षों बाद जब आकिब को आईपीएल में बड़ा कॉन्ट्रैक्ट मिला तो उनके पिता ने उसी फैसले को याद करते हुए जुबैर से कहा, 'अच्छा हुआ, उस दिन मैंने आपकी बात मान ली थी.'

यही एक फैसला आज भारतीय क्रिकेट के इतिहास का हिस्सा बन गया है. श्रीलंका दौरे के लिए भारतीय टेस्ट टीम में चयन के साथ आकिब नबी जम्मू-कश्मीर से भारत के लिए टेस्ट क्रिकेट खेलने वाले पहले क्रिकेटर बनने की दहलीज पर खड़े हैं. यह सिर्फ एक खिलाड़ी की उपलब्धि नहीं, बल्कि उस प्रदेश के क्रिकेट इतिहास का नया अध्याय है, जहां प्रतिभाओं को लंबे समय तक सीमित संसाधनों और परिस्थितियों से जूझना पड़ा.

आकिब की पहचान सिर्फ उनकी रफ्तार नहीं, बल्कि उनका स्वभाव भी है. जुबैर डार कहते हैं कि इतनी सफलता मिलने के बाद भी वह बिल्कुल नहीं बदले. आज भी उतने ही शांत, विनम्र और जमीन से जुड़े हैं. आईपीएल कैंप के लिए रवाना होने से पहले भी वह बिना किसी औपचारिकता के सीधे उनके घर मिलने पहुंच गए थे. यही सादगी उन्हें बाकी खिलाड़ियों से अलग बनाती है.

ये भी पढ़ें - जो IPL में नहीं चमका, वही बना बुमराह का रिप्लेसमेंट... आखिर क्यों?

उनकी मासूमियत के किस्से भी कम दिलचस्प नहीं हैं. बारामूला से करीब आठ किलोमीटर दूर शीरी गांव से निकला यह लड़का जब पहली बार श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर स्टेडियम में टर्फ विकेट पर खेलने पहुंचा तो पूरी रात उत्साह में सो नहीं पाया. लेकिन पहली ही गेंद डालते समय वह पिच पर फिसलकर गिर पड़े. वजह पूछी गई तो पता चला कि उन्होंने स्पाइक्स की जगह साधारण जूते पहन रखे थे. उन्हें यह भी नहीं मालूम था कि टर्फ विकेट पर तेज गेंदबाजी स्पाइक्स पहनकर की जाती है. बाद में एक सीनियर खिलाड़ी ने अपना ओवर खत्म होने के बाद अपनी स्पाइक्स उन्हें पहनने के लिए दे दीं.

एक और घटना उनकी सादगी का प्रमाण है. उस समय जम्मू-कश्मीर क्रिकेट संघ के दो अलग-अलग गुट अपने-अपने चयन शिविर आयोजित कर रहे थे. आकिब को इस विवाद की कोई जानकारी नहीं थी. वह पूरे उत्साह के साथ एक ही दिन दोनों चयन शिविरों में पहुंच गए. उनके लिए राजनीति या गुटबाजी नहीं, सिर्फ क्रिकेट मायने रखता था.

आज आकिब नबी भारत के लिए टेस्ट क्रिकेट खेलने की दहलीज पर खड़े हैं. यह सिर्फ एक खिलाड़ी के चयन की कहानी नहीं, बल्कि उस पिता की कहानी भी है जिसने आखिरकार बेटे के सपने पर भरोसा किया. कभी 12वीं की पढ़ाई और क्रिकेट के बीच उलझा यह लड़का अब भारत की टेस्ट कैप पहनने से बस एक कदम दूर है.

शेयर करें
हिंदी खबर नेटवर्क पर पढ़ें ताज़ा हिंदी समाचार।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

Hyderabad News: 58 हजार करोड़ से बदलेगी मूसी नदी की सूरत, लंदन की टेम्स की तर्ज पर बनेगा रिवरफ्रंट

बॉक्स ऑफिस कलेक्शन: पहले दिन 100 करोड़ पार 'टॉक्सिक', शाहरुख और रणवीर सिंह की इन फिल्मों का तोड़ डाला रिकॉर्ड

Toxic Box Office Collection Day 1: यश की टॉक्सिक ने पहले दिन कमाए 140 करोड़, जवान और एनिमल को छोड़ा पीछे