Exclusive: सोनिया गांधी ने अपनी बायोग्राफी में ऐसा क्या लिखा है कि पेंगुइन ने छापने से मना कर दिया?

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Exclusive: सोनिया गांधी ने अपनी बायोग्राफी में ऐसा क्या लिखा है कि पेंगुइन ने छापने से मना कर दिया?

29 अगस्त 2026 को 09:14 am बजे
Exclusive: सोनिया गांधी ने अपनी बायोग्राफी में ऐसा क्या लिखा है कि पेंगुइन ने छापने से मना कर दिया?
Exclusive: सोनिया गांधी ने अपनी बायोग्राफी में ऐसा क्या लिखा है कि पेंगुइन ने छापने से मना कर दिया?
  • सोनिया गांधी की किताब Belonging a Journey of Love को प्रकाशक ने भारत में छापने से मना किया है
  • बताया जा रहा है कि विवादित चैप्टरों में पीएम मोदी, चीन के कब्जे और आरएसएस के विषय शामिल हैं
  • कांग्रेस के कई नेता प्रकाशक पर मोदी सरकार के दबाव में सच छिपाने का आरोप लगा रहे हैं
नई दिल्ली:

सोनिया गांधी की आत्मकथा- 'Belonging a Journey of Love' को लेकर एक नया विवाद शुरू हो गया है. पहले यह जानकारी सामने आई थी कि पेंगुइन इस किताब को छापने वाला है. लेकिन गुरुवार को पब्लिशर ने इस किताब को छापने से अपने हाथ पीछे खींच लिए. जिसके बाद कांग्रेस के जितने नेताओं से बात करें, उतनी बातें सुनाई दे रही हैं. बहुत सारे लोग इस बात को लेकर ज्यादा उत्सुक हैं कि उनकी राजीव गांधी से मुलाकात कैसे हुई? फिर उन्होंने कब भारत आने का फैसला लिया? लोग ये भी जानना चाहेंगे कि राजीव गांधी से शादी करने और भारत आने के बाद भी उन्होंने भारतीय नागरिकता लेने में वक्त क्यों लगाया? लोग यह भी जानना चाहेंगे कि इंदिरा गांधी के साथ उनके संस्मरण, मेनका गांधी का घर छोड़ का जाना, कांग्रेस का अध्यक्ष बनना, अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार को हराकर यूपीए की सरकार बनवाना और मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री बनाना, जबकि वो खुद बन सकती थी, खुद पर लगे विदेशी मूल के टैग को कैसे खत्म किया.

कांग्रेस के सूत्र बता रहे हैं कि इन सब पर सोनिया गांधी ने जो लिखा है उस पर प्रकाशक को कोई आपत्ति नहीं है, तब सवाल उठता है कि सोनिया गांधी ने अपने किताब में ऐसा क्या लिख दिया है कि किताब का कवर जारी हो जाने के बाद प्रकाशक इसे छापने से मना कर रहे हैं.

सूत्रों की मानें तो सोनिया गांधी के किताब में तीन चैप्टर ऐसे हैं, जिस पर प्रकाशक को आपत्ति है, उसमें से एक है प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर लिखा गया लेख. इस लेख के बारे में कहा जा रहा है कि सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री के साथ हुए वन टू वन मुलाकातों के दौरान बातचीत का जिक्र किया है. साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि प्रधानमंत्री के उन बयानों का भी जिक्र है जो उन्होंने अपने भाषणों में सोनिया गांधी या अन्य विपक्षी महिला नेताओं के लिए कही है.
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एक चैप्टर जिस पर आपत्ति की बात कही जा रही है वह है, चीन का भारतीय जमीन पर कब्जा और सरकार की नाकामी. कुछ इसी तरह की बातों को लेकर जनरल नरवणे की किताब भी सुर्खियों और विवादों में रही थी और अभी तक भारत में नहीं छपी है. एक और टॉपिक है जिसको लेकर विवाद है, वह है संघ यानि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के बारे में.

सोनिया गांधी ने कितने डिटेल में इस पर लिखा है इसकी उतनी जानकारी तो नहीं निकल कर आ पाई है, मगर विभिन्न संस्थाओं पर संघ का कब्जा खासकर शिक्षण संस्थानों पर यह एक विषय हो सकता है, जो शायद बहुत लोगों को पसंद ना आए.

कुछ जानकार यह भी कहते हैं कि ये सभी मुद्दे ऐसे हैं जिसकी सारी बातें पहले से ही जनता के बीच मौजूद है, चाहे वो प्रधानमंत्री की बातें हो या चीन का अतिक्रमण या भी संघ की भूमिका. ये सब बातें कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी हमेशा से कहते आए हैं. कुछ जानकारों का मानना है कि कुछ और ही चीजें हो सकती हैं जिस पर प्रकाशक सोनिया गांधी से सहमत ना हो या कुछ ऐसा सबूत चाहता हो जिस पर प्रकाशक सौ फीसदी सही होना चाहता हो.
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बहरहाल कांग्रेस के नेताओं की प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई हैं. राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर लिखा है, ”श्रीमती सोनिया गांधी की आने वाली किताब को पेंगुइन वर्ल्डवाइड कंपनी मूलस्वरूप में दुनियाभर में छापने को तैयार है पर पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया भारत में इसे लॉन्च करने के लिए बदलाव करवाना चाहता है. आखिर ऐसी कौन-सी वजह या कौन सा दबाव है जो दुनिया-भर में छापा जा रहा है उसे भारत में नहीं छाप सकते?
असली मुद्दा यह है कि पेंगुइन इंडिया पर दबाव डाला गया कि मोदी, RSS और चीन द्वारा मोदी राज में भारतीय भूभाग पर कब्जे से जुड़े हिस्से हटाए जाएं. यह लोकतंत्र की हत्या है. इस सच को आखिर भारत की जनता के सामने आने से क्यों छिपाया जा रहा है? क्या मोदी सरकार प्रकाशकों पर दबाव डालकर तथ्यों को भी बदलवा देगी?”

उसी तरह गौरव गोगोई और अन्य कांग्रेसी नेताओं ने लिखा है कि सरकार सच को छिपाना चाहती है इसलिए प्रकाशक पर दबाव बना रही है.

अब इस विवाद के बाद सोनिया गांधी की किताब को छापने के लिए बाकी प्रकाशक सामने आ रहे हैं मगर इस किताब ने जनता और राजनीति में रूचि रखने वाले लोगों के बीच एक ऐसी उत्सुकता को पैदा कर दिया है, जो किताब के छपने और पढ़ने के बाद ही खत्म होगी. वहीं कुछ लोग यह भी कह रहे है कि इतना हंगामा क्यों बरपा है भाई.

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