PoK के PM बनने की नवाज शरीफ की ख्वाहिश रह गई अधूरी, इन्हें मिली जिम्मेदारी

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PoK के PM बनने की नवाज शरीफ की ख्वाहिश रह गई अधूरी, इन्हें मिली जिम्मेदारी

29 अगस्त 2026 को 08:24 am बजे
PoK के PM बनने की नवाज शरीफ की ख्वाहिश रह गई अधूरी, इन्हें मिली जिम्मेदारी

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर यानी PoK में सरकार की तस्वीर साफ हो गई है. यहां पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) के इफ्तिखार अली गिलानी को प्रधानमंत्री चुन लिया गया है. शुक्रवार को मुजफ्फराबाद में हुए मतदान में गिलानी को 44 में से 30 वोट मिले. उनके सामने पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के मुख्तार अहमद थे, जिन्हें 14 वोट मिले.

इफ्तिखार गिलानी के नाम का फैसला नवाज शरीफ ने गुरुवार को किया था. एक दिन बाद गिलानी ने विधानसभा में बहुमत हासिल कर पद संभालने का रास्ता साफ कर लिया.

दरअसल, चुनाव प्रचार के दौरान नवाज शरीफ ने PoK में कहा था कि अगर पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज चुनाव जीतती है, तो वह शहबाज शरीफ से कहेंगे कि उन्हें PoK का प्रधानमंत्री बनाया जाए. मगर नवाज शरीफ खुद इन चुनावों में नहीं उतरे थे. वह मौजूदा विधानसभा के सदस्य भी नहीं हैं. ऐसे में उनकी यह इच्छा पूरी नहीं हो सकी.

PoK की तथाकथित असेंबली में कुल 53 सीटें हैं, जिनमें से 45 पर सीधे जनता वोट डालती है, जबकि बाकी 8 सीटें महिलाओं, टेक्नोक्रेट्स और धर्मगुरुओं के लिए रिजर्व हैं.

फिलहाल सदन में कुल 46 सदस्य ही मौजूद हैं, क्योंकि पुंछ और सुधनोती जिलों की 7 सीटों पर कानून-व्यवस्था बिगड़ने के चलते चुनाव नहीं कराए जा सके. शुक्रवार को हुई वोटिंग में सिर्फ 44 विधायकों ने हिस्सा लिया. स्पीकर ने मतदान से दूरी बनाए रखी, वहीं पार्टी से अनबन के चलते शाह गुलाम कादिर भी सदन में नहीं पहुंचे.

PoK में विधानसभा चुनाव 27 जुलाई, 2 अगस्त और 3 अगस्त को तीन चरणों में कराए गए थे. इस पूरी चुनावी प्रक्रिया के दौरान जगह-जगह हिंसक झड़पें देखने को मिलीं और बड़े पैमाने पर धांधली के आरोप भी लगे.

सीधे चुनाव वाली 38 सीटों के नतीजों में नवाज शरीफ की पार्टी ने 25 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि बिलावल भुट्टो की पार्टी 12 सीटों पर सिमट गई. वहीं एक सीट जीतने वाली अवामी दस्त-ओ-बाजू पार्टी ने भी नवाज की पार्टी को अपना समर्थन दे दिया. इसके अलाव,  8 आरक्षित सीटों में से 6 सीटें नवाज की पार्टी की झोली में गईं और 2 सीटों से विपक्षी पार्टी को संतोष करना पड़ा.

PoK में संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी यानी JAAC के बैनर तले जून की शुरुआत से ही जबर्दस्त विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं. यह संगठन शरणार्थियों के लिए रिजर्व 12 सीटों का खुलकर विरोध कर रहा है. इन हिंसक झड़पों में कई आम नागरिकों और सुरक्षाकर्मियों की जान भी जा चुकी है. हालात बिगड़ते देख स्थानीय प्रशासन ने जून में ही JAAC पर पाबंदी लगा दी थी. ऐसे सुलगते माहौल के बीच गिलानी की ताजपोशी नई सरकार के लिए कांटों भरा ताज साबित हो सकती है.

भारत PoK पर पाकिस्तान के कब्जे को किसी भी सूरत में सही नहीं मानता. देश का साफ रुख है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख पूरी तरह भारत का अटूट अंग हैं, जिन पर पाकिस्तान ने जबरदस्ती और गैर-कानूनी तरीके से अपना कब्जा जमा रखा है.

फिलहाल PoK में गिलानी के चुने जाने के साथ नई सरकार की तस्वीर साफ हो गई है. अब नजर इस बात पर होगी कि हिंसक विरोध के बाद बने इस राजनीतिक माहौल में नई सरकार आगे कैसे काम करती है.

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