21 साल की उम्र में हुई विधवा, घर चलाने के लिए की फिल्मों में एक्टिंग, 200 से ज्यादा फिल्मों में नजर आईं बड़े पर्दे की ये 'प्यारी मां'

मनोरंजन

21 साल की उम्र में हुई विधवा, घर चलाने के लिए की फिल्मों में एक्टिंग, 200 से ज्यादा फिल्मों में नजर आईं बड़े पर्दे की ये 'प्यारी मां'

22 सितंबर 2026 को 06:55 am बजे
21 साल की उम्र में हुई विधवा, घर चलाने के लिए की फिल्मों में एक्टिंग, 200 से ज्यादा फिल्मों में नजर आईं बड़े पर्दे की ये 'प्यारी मां'
21 साल की उम्र में हुई विधवा, घर चलाने के लिए की फिल्मों में एक्टिंग, 200 से ज्यादा फिल्मों में नजर आईं बड़े पर्दे की ये 'प्यारी मां'
दुर्गा खोटे हिंदी सिनेमा की जानी मानी अदाकारा रही हैं
Social Media
नई दिल्ली:

दुर्गा खोटे का नाम भारतीय सिनेमा के उस दौर से जुड़ा है, जब महिलाओं का फिल्मों में काम करना आसान नहीं था. उन्होंने सिर्फ फिल्मों में कदम ही नहीं रखा, बल्कि पांच दशक से ज्यादा लंबे करियर में करीब 200 फिल्मों में काम किया और आगे चलकर हिंदी-मराठी सिनेमा की बेहद सम्मानित कलाकार बनीं. उनकी आत्मकथा 'मी दुर्गा खोटे' में एक किस्सा ऐसा है, जिसमें उन्हें फिल्म रिलीज होने के बाद समाज की नाराजगी का सामना करना पड़ा था. दुर्गा खोटे का जन्म 14 जनवरी 1905 को मुंबई में हुआ था. उनका जन्म का नाम वीटा लाड था.

बचपन में दुर्गा पिता के साथ नाटक देखने जाती थीं और यहीं से उनके मन में अभिनय और थिएटर के लिए रुचि पैदा हुई. कम उम्र में उनकी शादी विश्वनाथ खोटे से हुई. उनके दो बेटे हुए. लेकिन वह 21 साल की उम्र में विधवा हो गईं. उस समय उनके सामने अपने बच्चों की जिम्मेदारी थी और उन्हें आर्थिक रूप से खुद खड़ा होना था.

Latest and Breaking News on NDTV

Photo Credit: social media

इसी वजह से उन्होंने फिल्मों में काम करने का फैसला किया. यह फैसला उस समय बेहद बड़ा था, क्योंकि पारंपरिक और सम्मानित परिवारों की महिलाओं के लिए फिल्म इंडस्ट्री में जाना समाज आसानी से स्वीकार नहीं करता था. 1931 में रिलीज हुई 'फरेबी जाल' से दुर्गा का फिल्मी करियर शुरू हुआ, लेकिन यह फिल्म दर्शकों को पसंद नहीं आई. फिल्म की खराब प्रतिक्रिया का असर दुर्गा खोटे पर भी पड़ा.

आत्मकथा के अनुसार उस समय लाड और खोटे परिवार समाज में सम्मानित माने जाते थे और फिल्म में उनके काम करने को लेकर पहले से ही बातें हो रही थीं. फिल्म की खराब हालत के बाद महाराष्ट्रीयन समाज के एक हिस्से की नाराजगी का सामना उन्हें करना पड़ा. हालात यहां तक पहुंचे कि उनके लिए घर से बाहर निकलना भी मुश्किल हो गया.

दुर्गा खोटे के करियर को असली दिशा इसके बाद मिली. 1932 में उन्होंने 'अयोध्येचा राजा' में तारामती का किरदार निभाया. यह मराठी सिनेमा की महत्वपूर्ण फिल्मों में गिनी जाती है. इसके बाद 'माया मच्छिंद्र', 'अमर ज्योति', 'भारत मिलाप', 'सीता' और 'पृथ्वी वल्लभ' जैसी फिल्मों में उन्होंने काम किया. धीरे-धीरे वह सम्मानित कलाकार के रूप में पहचानी जाने लगीं.

Latest and Breaking News on NDTV

Photo Credit: social media

मुगल-ए-आजम में जोधाबाई, भरत मिलाप में कैकेयी, बिदाई, बावर्ची, बॉबी, अभिमान और करज जैसी फिल्मों में उनके किरदार आज भी याद किए जाते हैं. 'बिदाई' के लिए उन्हें फिल्मफेयर बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस अवॉर्ड मिला. उन्हें 1968 में पद्मश्री और 1983 में दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड से सम्मानित किया गया. भारत सरकार के डायरेक्टरेट ऑफ फिल्म फेस्टिवल के रिकॉर्ड में भी 1983 के दादा साहेब फाल्के पुरस्कार की विजेता के रूप में उनका नाम दर्ज है.

यह भी पढ़ें: बंजारों का 35 साल से फेवरेट है लता मंगेशकर का ये गाना, राजस्थान की मिट्टी से निकला विरह गीत, श्रीदेवी के डांस, चुलबुले एक्सप्रेशन से बना एवरग्रीन

दुर्गा खोटे ने सिर्फ अभिनय तक खुद को सीमित नहीं रखा. उन्होंने 1937 में 'साथी' फिल्म का निर्माण और निर्देशन भी किया और बाद के वर्षों में विज्ञापन, डॉक्यूमेंट्री और टीवी प्रोजेक्ट्स पर भी काम किया. उनकी आखिरी फिल्म 'दौलत के दुश्मन' 1983 में आई. 22 सितंबर 1991 को 86 साल की उम्र में उनका निधन हो गया.

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Durga Khote, Durga Khote Biography, Durga Khote Movies, Entertainment, Bollywood
शेयर करें

📌 संबंधित खबरें

हिंदी खबर नेटवर्क पर पढ़ें ताज़ा हिंदी समाचार।