'हर गवाह के बयान की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग जरूरी', HC का आदेश

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'हर गवाह के बयान की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग जरूरी', HC का आदेश

18 सितंबर 2026 को 07:45 am बजे
'हर गवाह के बयान की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग जरूरी', HC का आदेश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में गवाहों के बयान की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग को अनिवार्य करने पर विचार करने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने यूपी के DGP से इस संबंध में जरूरी कदम उठाने को कहा है. कोर्ट का कहना है कि इससे आपराधिक मामलों की जांच ज्यादा पारदर्शी और निष्पक्ष हो सकती है.

यह आदेश जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की बेंच ने सुनवाई के दौरान दिया. दरअसल, कोर्ट में आगरा के दहेज से जुड़े एक मामले में जमानत याचिका पर सुनवाई हो रही थी. सुनवाई के दौरान जांच अधिकारी ने माना कि उसने पहली शिकायतकर्ता का बयान दर्ज करते समय उसकी ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग नहीं की थी.

इलाहाबाद कोर्ट ने कहा कि BNSS की धारा 180(3) और BNSS 2024 के नियम 20(1) में जांच अधिकारी को गवाह का बयान ऑडियो-वीडियो इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से रिकॉर्ड करने की इजाजत है. यानी जांच के दौरान पुलिस के पास यह सुविधा पहले से मौजूद है.

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कोर्ट के सामने जांच अधिकारी ने अपनी गलती पर बिना शर्त माफी भी मांगी. इस दौरान कोर्ट ने DGP के 21 जुलाई 2025 और 4 अगस्त 2026 के सर्कुलर का भी जिक्र किया. इन सर्कुलर में गवाहों के बयान की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग से जुड़े निर्देश दिए गए हैं.

हाईकोर्ट ने कहा कि उसके सामने ऐसे कई मामले आए हैं, जहां जांच अधिकारियों ने गवाहों के बयान की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग नहीं की. ऐसा तब हुआ, जब DGP के सर्कुलर में इसकी व्यवस्था पहले से मौजूद थी.

कोर्ट ने कहा कि कई जांच अधिकारी इस रिकॉर्डिंग से बचते हैं. एक वजह यह भी बताई गई कि वे खुद पर लगने वाले आरोप से बचना चाहते हैं. आरोप यह हो सकता है कि गवाह का बयान जांच अधिकारी ने खुद लिखा है. कई बार FIR की बातों को ही बयान में दोहरा दिया जाता है.

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कोर्ट ने DGP के सर्कुलर नंबर 24/2025 का भी जिक्र किया. इसमें रेप पीड़िता का बयान दर्ज करते समय ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य है. वहीं BNSS की धारा 180 के तहत दूसरे गवाहों के बयान की रिकॉर्डिंग को ऑप्शनल रखा गया है.

हाईकोर्ट ने कहा कि इस विकल्प का कई जांच अधिकारियों ने गलत इस्तेमाल किया है. इसी वजह से कोर्ट ने DGP को सभी बयानों की रिकॉर्डिंग अनिवार्य करने पर विचार करने का निर्देश दिया.

कोर्ट ने DGP से कहा कि सभी जांच अधिकारियों को इन दिशा-निर्देशों की जानकारी दी जाए. अधिकारियों को नियमों का पालन करने के लिए जरूरी निर्देश भी दिए जाएं. जांच का मकसद असली आरोपी को न्याय के सामने लाना होना चाहिए. साथ ही निर्दोष लोगों को गलत जांच के कारण परेशान नहीं किया जाना चाहिए.

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह निर्देश चंद्रकांत की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया. यह मामला आगरा जिले से जुड़ा दहेज का केस है. हाईकोर्ट का कहना है कि इस निर्देश का मकसद जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाना और गवाहों के बयानों को लेकर उठने वाले सवालों को कम करना है.

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