खेतों में दौड़ता था मेरा बेटा... गुलवीर के सिल्वर पर मां हुईं भावुक
खेतों में दौड़ता था मेरा बेटा... गुलवीर के सिल्वर पर मां हुईं भावुक
ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के लिए इतिहास रचने वाले स्प्रिंटर गुलवीर सिंह की सफलता का जश्न अब सिर्फ स्टेडियम तक सीमित नहीं है. उनके गांव सिरसा में खुशी की लहर है और परिवार गर्व से फूला नहीं समा रहा. गुलवीर ने पुरुषों की 10,000 मीटर दौड़ में रजत पदक जीतकर इतिहास रच दिया. वह कॉमनवेल्थ गेम्स की मेन्स 10 हजार मीटर स्पर्धा में पदक जीतने वाले पहले भारतीय हैं.
गुलवीर सिंह की सफलता पर उनकी मां लक्ष्मी भावुक हो गईं. उन्होंने कहा कि गुलवीर बचपन में खेतों में दौड़ा करता था और आज उसी मेहनत के दम पर उसने परिवार और देश का नाम दुनिया भर में रोशन कर दिया.
#WATCH | Aligarh, Uttar Pradesh | On Naib Subedar Gulveer Singh winning a silver medal in the Men’s 10000m at the Commonwealth Games 2026, Gulveer’s mother Laxmi says, “Gulveer used to run in the fields; that is how he brought glory to our name… He is doing well and aspires to… pic.twitter.com/cW93ZdiJl1
लक्ष्मी ने अपने बेटे की सफलता पर खुशी जाहिर करते हुए कहा, 'गुलवीर पहले खेतों में दौड़ता था. वहीं से उसने अपने सफर की शुरुआत की और आज हमारे परिवार का नाम रोशन कर दिया. वह बहुत अच्छा कर रहा है और आगे भी बड़ी उपलब्धियां हासिल करना चाहता है. मैं बहुत खुश हूं. भगवान करे मेरा बेटा आगे भी देश का नाम रोशन करता रहे.'
इस ऐतिहासिक उपलब्धि के बाद उनकी पत्नी बबीता ने अपनी खुशी जाहिर की. बबीता ने कहा कि उनके पति ने सिर्फ परिवार ही नहीं बल्कि पूरे जिले और देश का सम्मान बढ़ाया है. उन्होंने कहा, 'कल मेरे पति ने रेस में दूसरा स्थान हासिल किया. उन्होंने हमारे जिले और पूरे देश का नाम रोशन किया है. घर में सभी लोग बेहद खुश हैं. पूरे गांव में जश्न जैसा माहौल है और हर कोई उनकी इस सफलता पर गर्व महसूस कर रहा है.'
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में गुलवीर सिंह ने 27 मिनट 49.78 सेकेंड का समय निकालते हुए रजत पदक अपने नाम किया. पूरी रेस के दौरान वह शीर्ष धावकों के साथ बने रहे और आखिरी लैप में शानदार स्प्रिंट लगाकर दूसरे स्थान पर फिनिश किया. इस स्पर्धा का स्वर्ण पदक ऑस्ट्रेलिया के काई रॉबिन्सन ने जीता. गुलवीर की यह उपलब्धि भारतीय एथलेटिक्स के लिए मील का पत्थर मानी जा रही है.
मां के इस बयान ने गुलवीर सिंह की संघर्ष भरी यात्रा को एक बार फिर सामने ला दिया. खेतों में दौड़ने से शुरू हुआ उनका सफर अब कॉमनवेल्थ गेम्स के ऐतिहासिक रजत पदक तक पहुंच चुका है. सेना से जुड़े गुलवीर सिंह पिछले कुछ वर्षों से लगातार शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं. कॉमनवेल्थ गेम्स का यह रजत पदक उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हो गया है.
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें